3 अक्टूबर 2013

सुरक्षा के नाम पर सेंध

         
          सीआईए अधिकारी, स्नोडेन ने अमेरिका द्वारा अन्य देशों की जासूसी कराये जाने से संबंधित जो खुलासे किये हैं उस पर विश्व भर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आयीं हैं/ जिसे अमेरिका सुरक्षा के लिए जरुरी प्रक्रिया के रूप में भुनाने पर जुटा है वो दरसल उसकी सीमाओं का अतिक्रमण है/ आज लगभग सारा विश्व आतंकवाद के बिच्छू का दंश झेल रहा है/ देश की अंदरूनी गतिविधियों के साथ साथ विश्व भर की संदिग्ध घटनाओं पर नजर रखना जरुरी हो गया है/ यूँ तो हर एक देश की गुप्तचर एजेंसियां अन्य देशों में हो रही अस्वाभाविक घटनाओं की जानकारी रखती ही हैं/ मगर इसकी आढ़ में जिम्मेदार देशों के राजनयिकों के फ़ोन टेप करना, देशों के पत्र व्यवहार पर नजर रखना, उनके दस्तावेजों की गुपचुप जासूसी स्वीकार्य नहीं है/ अमेरिका ने इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्रों का उल्लंघन किया है/
          ओबामा जी ने कहा कि हमारे खुफिया अधिकारियों की रूचि आपके व्यक्तिगत पत्र, व्यक्तिगत फ़ोन टेप करने में नहीं है, मगर ओबामा जी, हमारे राजनयिकों के बीच होने वाले आपसी वार्तालाप व सूचना का आदान प्रदान भी आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते/ सुरक्षा के नाम पर अमेरिकी एजेंसियां जिस तरह अन्य देशों के हर एक कामकाज की जानकारी जुटा रहीं हैं उसका सीधा उपयोग आर्थिक, सामरिक व व्यापारिक क्षेत्र में खुद को प्रतिस्पर्धी व मजबूत करने में किया जा सकता है/ क्यूंकि यहाँ आप हर देश की किसी भी नीति, योजना व कार्यक्रम पर अवैध तरीके से नजर गढ़ाए बैठे हैं/ इस तरह की सेंध अंतर्राष्ट्रीय समुदाए में सिर्फ अविश्वास ही पैदा करेगी और साथ ही आपकी मंशा पर भी सवाल उठेंगे/ 
           भारत भी उसकी जासूसी की जद में है और ये भारत की सुरक्षा के लिहाज से खतरा है, फिर चाहे वो आर्थिक हो , सामरिक या फिर व्यापारिक/ अगर आपके घरेलु कामकाज, आपके अंदरूनी वार्तालाप, आपके शासकीय पत्राचार, दस्तावेजों के आदान प्रदान पर जासूसी निगाह गढ़ी हुई है तो आप पूर्ण सुरक्षित होने का दम नहीं भर सकते/ भारत को बिना किसी लागलपेट के अमेरिका से सीधा स्पष्टीकरण मांगना चाहिए कि क्यूँ उसने भारत की संप्रभुता, और निजता को नुकसान पहुँचाया/ अपनी सुरक्षा के नाम पर एक शांतिपूर्ण, स्वतंत्र, और सम्प्रभु राष्ट्र की निगरानी करने का अधिकार उसे किसने दिया/ अमेरिका भारत को विश्वास दिलाये कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी/ भारत वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार राष्ट्र है और आतंकवाद के खिलाफ हर तरह से प्रतिबद्ध है मगर इस तरह उसकी जासूसी उसे कतई स्वीकार्य नहीं है/
 

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