शांति और अहिंसा का एक और दिया बुझ गया/ बंधुत्व व भाईचारे के अग्रदूत रोलिहलहला डालीभूंगा मंडेला हमारे बीच नहीं हैं/ दक्षिण अफ्रीका के केप प्रान्त के एक कबीले में जन्मे मंडेला ने सारा जीवन रंगभेद व नसलभेद के खिलाफ लड़ने में बिता दिया/ अपने जीवन के खूबसूरत २७ साल उन्होंने रॉबेन द्वीप की जेल में यातनाएं भोगते हुए बिताये/ मगर जेल कठिन समय में भी पत्रों और पुस्तकों के माध्यम से उस आंदोलन को जीवंत बनाये रखा जिसका उद्देश्य श्वेत लोगों के दमन और शोषण से अश्वेत लोगों को मुक्ति दिलाना था/ अंतत: लम्बे संघर्ष के बाद १९९४ में देश के पहले लोकतान्त्रिक चुनाव में वो अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति निर्वाचित हुए/
नेल्सन मंडेला ने सिर्फ अश्वेत लोगों को रंगभेद से मुक्त ही नहीं कराया बल्कि देश में विभिन्न मूल के लोगों को जोड़ कर भी रखा/ श्वेत शासकों द्वारा जेल में यातनाएं देने के बावजूद वो किसी भी तरह की कटुता से अछूते रहे/ उनका आंदोलन कभी भी श्वेत लोगों के खिलाफ नहीं बल्कि उनकी नीतियों के विरोध में था/ मंडेला एक सौम्य और करिश्मायी व्यक्तित्व के धनी थे/ उनकी पहचान राजनेता से कहीं ज्यादा एक नैतिक नेता के रूप में रहेगी/ हमारे और दक्षिण अफ्रीका के लोगों के लिए उन्होंने जो विरासत छोड़ी है वो यही बयां करती है कि बिना किसी भेदभाव के मिल जुल कर रहें,/ यही उस शांतिदूत को हमारी सच्ची श्रद्धांजली होगी/


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