4 जून 2018

गिरता मकान


सवाल  जवाब  सवाल  जवाब 
आरोप  प्रत्यारोप, भाषण , बयानबाजी 
नए  नए  मुद्दों  पर  होती  बहसें 
धांय धांय धूं धूं  
शब्दों  की  गोलीबारी 
मची  है उठा  पटक 
छींछालेदर 
टीवी  पे  आओ, अख़बार में छाओ, कार्यक्रमों में दिखाओ 
भीड़ में चमको  कुछ  भी  बोल  कर 
सबको  दिखना  है  सबको  बिकना  है 
रंग  बिरंगे  बाजारों  में, बड़े  बड़े  मूल्यों  पर 
ख्याति  की  अनुशंसा  पर 
डराता  है  ये  सन्नाटा  भरा  शोर …………………
मगर फिर भी
कुछ होने न होने, बदलाव और सुधारों
की अनिश्चितता के बीच

नाकारेपन   की  इस  अम्लीय  बारिश  में  
मीठे  पानी  की  बूंदें  घोलते 
कुछ  अनदेखे  चेहरे 
चुपचाप  लगातार  कर  रहे  हैं  अपना काम, बिना  थके 
बस  कहीं  हमारे   ही  बीच  बिना  प्रसिद्धि  की भूख के
सामने नहीं आते पर  
साध  रखीं हैं  घर  की  भंगुर  दीवारें  तुमने 
जहाँ  तहाँ …….
नींव के बचे हुए पत्थर की तरह

-विपिन सिंह                                         

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