एक लम्बे कुम्भकर्णी विश्राम के बाद आखिरकार ये ब्लॉग फिर से खुल गया वैसे इसके विश्राम में हमारे आलस का बढ़ा योगदान है/ नई शुरुआत के लिए बीते सप्ताह इसके विन्यास में बहुत सर खपाया/ दरअसल, नक्श पर काम करते करते हम ब्लॉगर की तकनीकी गहराई में चले गए थे, पर जल्द ही अपनी मर्यादाओं को समझते हुए चुपचाप गूगल बाबा का सहारा ले लिया/ नया लिखने के लिए पुराना हटा दिया है/ अब अपनी कवितायेँ झिलाने के साथ साथ कुछ और भी लिखेंगे, उम्मीद है इस बार निरंतरता रहेगी/ शेष भविष्य के गर्भ में.....
13 अगस्त 2013
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