चुनावी सर्वेक्षण के परिणाम चुनाव के नतीजों पर कितना असर डालते हैं ये कहना थोडा मुश्किल है, कई मौकों पर चुनाव के नतीजे इन सर्वेक्षणों के बिलकुल विपरीत रहे हैं तो कई दफा इनके अनुरूप भी/ मगर ये सर्वेक्षण और इनके परिणाम मतदाता का अजेंडा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं खासकर वो मतदाता जो आमतौर सरकार या राजनैतिक गतिविधियों में रुचिं नहीं लेता, इन्हीं सर्वेक्षणों को ही अपने वोट का आधार बना लेता है/ वो सोचता है कि यदि फलां फलां पार्टी इस सर्वेक्षण में विजयी हुई है तो उसमें अवश्य ही कुछ बात होगी/ उसे जनसमर्थन प्राप्त है अत: किसी और को वोट देकर मुझे अपना वोट व्यर्थ नहीं करना चाहिए/ ऐसे तमाम तरह के विचार मतदाता की सोच निर्धारित कर सकते हैं या उसकी दिशा भी बदल सकते हैं/
इन मनोवैज्ञानिक पक्षों का फायदा उठाया जा सकता है/ कई राजनैतिक दल अपने समर्थकों या समर्थन वाले क्षेत्रों (जिनमें हो सकता है कि कुछ विशेष सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक या धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग ही शामिल हों) में सर्वेक्षण कराकर उनके नतीजों को जनता की राय के रूप में प्रचारित करते हैं/ कभी कभी हमारा मीडिया भी पक्षपाती रवैया अपनाते हुए किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से ऐसे सर्वेक्षणों को आयोजित करता है/ इस तरह से मतदाता को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता है/
इन नकारात्मक पहलुओं पर विचार करते हुए यदि हम इन चुनावी सर्वेक्षणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दें, तो ये एक तीखी सोच का निर्णय कहा जायेगा/ विभिन्न राजनैतिक दलों के या निर्दलीय उम्मीदवार जो जनता के प्रतिनिधि के रूप में इस देश के लोगों के नियामक बनना चाहते हैं, उनके बारे में अपनी पसंद या नापसंद जाहिर करने का हक़ जनता को है/ लोग अपनी राय रखने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं, चाहे वो वोट के रूप में सहमति जताकर हो या फिर इस तरह के सर्वेक्षणों में भाग लेकर/ चुनावी सर्वेक्षणों को प्रतिबंधित कर हम स्वतंत्र अभिव्यक्ति के सिद्धांत को तो कमजोर करेंगे ही, देश में लोगों के बीच संवाद का एक माध्यम भी ख़त्म हो जायेगा/ जब मीडिया निष्पक्ष रूप से कराये गए सर्वेक्षण जनता के सामने रखती है तो उन्हें अन्य लोगों के विचारों को समझने का अवसर मिलता है
चुनावी सर्वेक्षणों पर प्रतिबन्ध लगाने से बेहतर है हम इनकी निष्पक्षता व पारदर्शिता पर काम करें/ इन सर्वेक्षणों के प्रसारण के सम्बन्ध में कुछ दिशा निर्देश तय किये जा सकते हैं/ जैसे कि चुनावी सर्वेक्षणों के नतीजे दिखाते समय यह भी बताया जाये कि सर्वेक्षण किस क्षेत्र में कराया गया, सर्वेक्षण में कितने लोगों ने भाग लिया, सर्वेक्षण में किस पृष्ठभूमि के लोगों को सम्मिलित किया गया, सर्वेक्षण में पूछे गए मुख्य सवाल क्या थे/ इसके अतिरिक्त नतीजों के साथ कुछ सलाह संदेशों को भी प्रसारित किया जा सकता है उदहारण के तौर पर "ये नतीजे सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों कि निजी राय पर आधारित हैं दर्शक अपनी राय अपने विवेक के आधार पर तय करें" /
इस तरह के कुछ प्रयासों से हम इन सर्वेक्षणों की स्पष्ट तस्वीर लोगों के सामने रख पाएंगे और मतदाता समाज के अन्य तबकों के विचारों को जानते परखते हुए स्वतंत्र रूप से अपना अजेंडा तय कर सकेंगे/ हालाँकि इस सबके बीच चुनाव आयोग का ये फैसला बिलकुल सही है कि चुनाव के ४८ घंटे पूर्व इन सर्वेक्षणों के नतीजे प्रसारित न किये जाएँ ताकि उस दौरान इन सर्वेक्षणों के माध्यम से किसी भी तरह के पार्टी प्रचार को रोका जा सके/