7 दिसंबर 2013

मंडेला का अवसान : एक युग का समापन

       
      
        शांति और अहिंसा का एक और दिया बुझ गया/ बंधुत्व व भाईचारे के अग्रदूत रोलिहलहला डालीभूंगा मंडेला हमारे बीच नहीं हैं/ दक्षिण अफ्रीका के केप प्रान्त के एक कबीले  में  जन्मे मंडेला ने सारा जीवन रंगभेद व नसलभेद के खिलाफ लड़ने में  बिता दिया/ अपने जीवन के खूबसूरत २७ साल उन्होंने रॉबेन द्वीप की जेल में  यातनाएं भोगते हुए बिताये/ मगर जेल कठिन समय में  भी पत्रों और पुस्तकों के माध्यम से उस आंदोलन को जीवंत बनाये रखा जिसका उद्देश्य श्वेत लोगों के दमन और शोषण से अश्वेत लोगों को मुक्ति दिलाना था/ अंतत: लम्बे संघर्ष के बाद १९९४ में देश के पहले लोकतान्त्रिक चुनाव में वो अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति निर्वाचित हुए/
     
        नेल्सन मंडेला ने सिर्फ अश्वेत लोगों को रंगभेद से मुक्त ही नहीं कराया बल्कि देश में  विभिन्न मूल के लोगों को जोड़ कर भी रखा/ श्वेत शासकों द्वारा जेल में यातनाएं देने के बावजूद वो किसी भी तरह की कटुता से अछूते रहे/ उनका आंदोलन कभी भी श्वेत लोगों के खिलाफ नहीं बल्कि उनकी नीतियों के विरोध में था/ मंडेला एक सौम्य और करिश्मायी व्यक्तित्व के धनी थे/ उनकी पहचान राजनेता से कहीं ज्यादा एक नैतिक नेता के रूप में रहेगी/ हमारे और दक्षिण अफ्रीका के लोगों के लिए उन्होंने जो विरासत छोड़ी है वो यही बयां करती है कि बिना किसी भेदभाव के मिल जुल कर रहें,/ यही उस शांतिदूत को हमारी सच्ची श्रद्धांजली होगी/ 

3 अक्टूबर 2013

सुरक्षा के नाम पर सेंध

         
          सीआईए अधिकारी, स्नोडेन ने अमेरिका द्वारा अन्य देशों की जासूसी कराये जाने से संबंधित जो खुलासे किये हैं उस पर विश्व भर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आयीं हैं/ जिसे अमेरिका सुरक्षा के लिए जरुरी प्रक्रिया के रूप में भुनाने पर जुटा है वो दरसल उसकी सीमाओं का अतिक्रमण है/ आज लगभग सारा विश्व आतंकवाद के बिच्छू का दंश झेल रहा है/ देश की अंदरूनी गतिविधियों के साथ साथ विश्व भर की संदिग्ध घटनाओं पर नजर रखना जरुरी हो गया है/ यूँ तो हर एक देश की गुप्तचर एजेंसियां अन्य देशों में हो रही अस्वाभाविक घटनाओं की जानकारी रखती ही हैं/ मगर इसकी आढ़ में जिम्मेदार देशों के राजनयिकों के फ़ोन टेप करना, देशों के पत्र व्यवहार पर नजर रखना, उनके दस्तावेजों की गुपचुप जासूसी स्वीकार्य नहीं है/ अमेरिका ने इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्रों का उल्लंघन किया है/
          ओबामा जी ने कहा कि हमारे खुफिया अधिकारियों की रूचि आपके व्यक्तिगत पत्र, व्यक्तिगत फ़ोन टेप करने में नहीं है, मगर ओबामा जी, हमारे राजनयिकों के बीच होने वाले आपसी वार्तालाप व सूचना का आदान प्रदान भी आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते/ सुरक्षा के नाम पर अमेरिकी एजेंसियां जिस तरह अन्य देशों के हर एक कामकाज की जानकारी जुटा रहीं हैं उसका सीधा उपयोग आर्थिक, सामरिक व व्यापारिक क्षेत्र में खुद को प्रतिस्पर्धी व मजबूत करने में किया जा सकता है/ क्यूंकि यहाँ आप हर देश की किसी भी नीति, योजना व कार्यक्रम पर अवैध तरीके से नजर गढ़ाए बैठे हैं/ इस तरह की सेंध अंतर्राष्ट्रीय समुदाए में सिर्फ अविश्वास ही पैदा करेगी और साथ ही आपकी मंशा पर भी सवाल उठेंगे/ 
           भारत भी उसकी जासूसी की जद में है और ये भारत की सुरक्षा के लिहाज से खतरा है, फिर चाहे वो आर्थिक हो , सामरिक या फिर व्यापारिक/ अगर आपके घरेलु कामकाज, आपके अंदरूनी वार्तालाप, आपके शासकीय पत्राचार, दस्तावेजों के आदान प्रदान पर जासूसी निगाह गढ़ी हुई है तो आप पूर्ण सुरक्षित होने का दम नहीं भर सकते/ भारत को बिना किसी लागलपेट के अमेरिका से सीधा स्पष्टीकरण मांगना चाहिए कि क्यूँ उसने भारत की संप्रभुता, और निजता को नुकसान पहुँचाया/ अपनी सुरक्षा के नाम पर एक शांतिपूर्ण, स्वतंत्र, और सम्प्रभु राष्ट्र की निगरानी करने का अधिकार उसे किसने दिया/ अमेरिका भारत को विश्वास दिलाये कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी/ भारत वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार राष्ट्र है और आतंकवाद के खिलाफ हर तरह से प्रतिबद्ध है मगर इस तरह उसकी जासूसी उसे कतई स्वीकार्य नहीं है/

29 अगस्त 2013

नेताजी की मटकी

आज-
गाँव से इक और त्यौहार का हरण
शहर के चौराहे पर सरेआम
अब मटकी का राजनीतिकरण
दो कोस की सड़क, आठ झांकी आयोजित
सारी की सारी बाहुबली प्रायोजित
चंदा के नाम पर हप्ता वसूली
मटकी थी या शायद
किसी की मेहनत की सूली
निर्बल रुपये की झालर सजी
बूढी अम्मा सी क्रेन, मटकी लिए खडी
पलना कहीं खोपचे में छुपा
मंच पे नेताजी का सिंहासन लगा.....

उमंग के नाम हुडदंग हुआ
वर्चस्व दिखाने कृष्ण जन्म का स्वांग हुआ
प्रसाद कहाँ, होड़ मची, बख्शीश बंटी
कुछ नन्हे नन्हे ग्वालों की उम्र घटी….

जन डूबे माँ मुन्नी, शीला  के भजनों में
कुछ मग्न हो चले अतिथि के सपनों में
कहीं बिपाशा, कहीं कंगना, मलाइका के
स्वागत की तैयारी
भटक रहे थे जगह ढूंढते
दर दर कृष्ण मुरारी………
                                                              

15 अगस्त 2013

इस बरस, स्वाधीनता दिवस


स्वाधीनता दिवस की तैयारी चल रही है
ध्वज संदूक से निकला है, उसकी धुलाई चल रही है
मानते हैं, थोडा सत्ता के कीचड़ में सना है
मुंह के बल पड़ी अर्थव्यवस्था से दबा है
कहीं कहीं छींटे हैं स्वार्थ की लार के
सड़कों पर फैलती धार्मिक टार के
चरमरायी नीतियों की सलवटें पडीं हैं
संवैधानिक प्रष्ठों की लुगदी भी चढी है
हरे रंग की चमक दिखती ही नहीं
कोयले सी कालिख हटती ही नहीं
केसरिया धुंधला गया है
शहादत पे राजनीति का बादल छा गया है
खैर, कौन सा इसे साल भर लहरना है
बस कल ही तो फहरना है
इसीलिए लाल किले की रंगाई चल रही है
ध्वज संदूक से निकला है, उसकी धुलाई चल रही है /

13 अगस्त 2013

प्रथम परिपत्र

एक लम्बे कुम्भकर्णी विश्राम के बाद आखिरकार ये ब्लॉग फिर से खुल गया वैसे इसके विश्राम में हमारे आलस का बढ़ा योगदान है/ नई शुरुआत के लिए बीते सप्ताह इसके विन्यास में बहुत सर खपाया/ दरअसल, नक्श पर काम करते करते हम ब्लॉगर की तकनीकी गहराई में चले गए थे, पर जल्द ही अपनी मर्यादाओं को समझते हुए चुपचाप गूगल बाबा का सहारा ले लिया/ नया लिखने के लिए पुराना हटा दिया है/ अब अपनी कवितायेँ झिलाने के साथ साथ कुछ और भी लिखेंगे, उम्मीद है इस बार निरंतरता रहेगी/ शेष भविष्य के गर्भ में..... 
 

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