29 अगस्त 2013

नेताजी की मटकी

आज-
गाँव से इक और त्यौहार का हरण
शहर के चौराहे पर सरेआम
अब मटकी का राजनीतिकरण
दो कोस की सड़क, आठ झांकी आयोजित
सारी की सारी बाहुबली प्रायोजित
चंदा के नाम पर हप्ता वसूली
मटकी थी या शायद
किसी की मेहनत की सूली
निर्बल रुपये की झालर सजी
बूढी अम्मा सी क्रेन, मटकी लिए खडी
पलना कहीं खोपचे में छुपा
मंच पे नेताजी का सिंहासन लगा.....

उमंग के नाम हुडदंग हुआ
वर्चस्व दिखाने कृष्ण जन्म का स्वांग हुआ
प्रसाद कहाँ, होड़ मची, बख्शीश बंटी
कुछ नन्हे नन्हे ग्वालों की उम्र घटी….

जन डूबे माँ मुन्नी, शीला  के भजनों में
कुछ मग्न हो चले अतिथि के सपनों में
कहीं बिपाशा, कहीं कंगना, मलाइका के
स्वागत की तैयारी
भटक रहे थे जगह ढूंढते
दर दर कृष्ण मुरारी………
                                                              

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